जब कोई मौलाना गलत हरकत करे, तो वो इंसान खराब है मजहब तो पाक है।
अगर कोई पादरी गलत काम करे तो वो उसका गलती है, यीशु तो महान है।
कोई नास्तिक गलत काम करे तो वो उसकी गलती है, नास्तिकता तो मानवतावादी है।
पर अगर हिंदू धर्म में कोई नाली का कीड़ा गंदगी करे, तो हिंदू धर्म अंधश्रद्धा है।
और ये वो लोग बोलते है जिन्होंने कभी वेद पढ़े नहीं, पुराण पढ़े नहीं, और ना ही वो हिंदू धर्म मानते है। इसपर हिंदू चुप बैठ जाते है क्यों कि उनको ही उनके धर्म के बारेमे ज्ञान नहीं।
हिंदू कभी दूसरों के धर्म या मजहब के बारे में नहीं बोलता। पर जब लोग हिंदू धर्म पर सवाल उठाते है तो हिंदू लोग सुन लेते है।
क्यों कि इन्होंने खुद कभी वेद और पुराण नहीं पढ़े है अगर पढ़ते तो कोई इनको पागल बना ही नहीं सकता था।
दोष किसी धोखेबाज का नहीं है, वो तो नास्तिक है तभी तो देवी देवता की मूर्ति के सामने गंदा काम किया। एक आस्तिक व्यक्ति तो मंदिर में जाकर अगर गंदा विचार भी आए तो आत्मग्लानि से भर जाता है।
दूसरे धर्म और मजहब वालों को हमारे धर्म के बारेमे बोलने से रोको क्यों कि हम किसी के धर्म के बारेमे नहीं बोलते।
हिंदुओं ये नपुंसकता तुम्हे शोभा नहीं देती, अंधश्रद्धा तब होती है जब किसी भी व्यक्ति, वस्तु या बात पर आंखे मूंदकर भरोसा किया जाता है।
पर यहां भरभर के शास्त्र, वेद, पुराण पड़े है अभ्यास के लिए, अगर पढ़ लोगे तो ज्ञान मिलेगा और वो अंधश्रद्धा नहीं कहलाएगी।
ढोंगी उसी व्यक्ति को लूट सकता है जिसे उसके धर्म का ज्ञान नहीं और जिसके मन में लालच है, बिना कुछ किए बहुत कुछ पाने की लालसा है।
और एक बात याद रखना इन ढोंगी सदैव नास्तिक ही होता है, वो धर्म को मोहरा बनाकर अज्ञानी लोगों की लालच का सहारा लेके उनको लुटने के तरीके ढूंढता है। आस्तिक व्यक्ति कभी भी ईश्वर का नाम लेके किसीको लूटने की मनीषा नहीं रखता।
अगर सच में आध्यात्मिक होना चाहते हो तो शास्त्र, वेद, पुराण पढ़ो अभ्यास करो।
ढोंगी लोग सिर्फ आपकी मानसिकता देखके आपको लुट सकते है, अगर आप खुद साधना उपासना में जुड़े हो तो इनकी औकात नहीं आपको लूटने की क्यों कि इतनी अकल तो आ ही जाती है।
पर अगर अध्यात्म को करियर की दृष्टि से देख रहे हो, पैसा कमाने के लिए सोच रहे हो, तो तुम भी ढोंगी हो। तुम भी पेले जाओगे।
बस इतना कहना चाहूंगा,
व्यक्ति गलत है तो व्यक्ति को गाली दो, विरोध करो।
पर अगर हिंदू होकर अपने ही धर्म को अंधश्रद्धा बोलोगे (वो भी बिना शास्त्र, वेद, पुराण पढ़े) और कोई बोले कि तुम्हारा धर्म तो अंधश्रद्धा है और तुम सुन रहे हो और साथ भी दे रहें हो तो तुम वो नपुसंक हो, जिसकी माता को लोग भरे बाजार में गाली दे रहे है और वो खुद हिजड़े के जैसे ताली बजा रहा है।
व्यक्ति को कोई गाली दे बुरा बोले तो कोई फरक नहीं पड़ता क्यों कि लोग केवल व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्ति के देह, या व्यक्ति के कर्मों को गाली दे सकते है।
पर मेरी आत्मा मेरे सनातन धर्म को कोई गाली दे तो वो मेरी मां है। और मै यहां धर्म की बात कर रहा हु जाती या caste की नहीं सो जातिवादी लोग मेरे से दूर रहे।
और मेरे धर्म को गाली देने वाले हर इंसानी कीड़े को मेरे आत्मा के कण कण से श्राप है।
शांति!

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