नीचे लिखी गई बाते पूर्णतः काल्पनिक है (अभी के लिए) 😈
आजकल पूर्ण जगत मे युद्ध की चर्चा है, और सबको चाहिए युद्ध पर विराम लगना चाहिए। एक तरफ आप परिवर्तन भी चाहते हो और दूसरी तरफ विनाश भी नहीं चाहते। पूर्ण विनाश के बिना नवनिर्माण असंभव है। अभी पूरा विश्व संक्रमण काल मे है बदलाव चाहती है सृष्टि, पूर्ण विनाश होकर नया निर्माण होगा। बुरों के साथ अच्छे लोग भी मारे जाएंगे और होना भी चाहिए, युद्ध अच्छे बुरे, बच्चों बूढ़ों मे भेद नहीं करता। दुश्मन की गोली सामने बच्चा बूढ़ा औरत देखके नहीं लगेगी ना बम पूछ के गिरेगा।
कुछ लोग अबतक बोलते थे कुछ चेंज नहीं होगा और अब होने जा रहा है तो ऐसे लोगोंकी अभी से फटी पड़ी है की अब क्या होगा। अब यही लोग युद्ध को रोकने की बाते करते है। अभी तो शुरू भी नहीं हुआ ठीक से सारे देश बस नेट प्रैक्टिस कर रहे है। फिर भी पैनिक हो रहे। अभी बस टीम बनाई जा रही है की कौन किस टीम मे रहेगा। जिस दिन टीम बन गई उस दिन युध्द शुरू हो जाएगा। और यहा किसी पार्टी या व्यक्ति का कोई जोर नहीं चलेगा। यहा बात आएगी survival की जिसमे दम होगा वो जिएगा फिर चाहे वो पापी हो या फिर पुण्यवान। और हां अध्यात्म भी ऐसा ही निष्ठुर है। यहा ये मायने नहीं रखता की आपने कितने अभिषेक किए शिवजी को, कितनी बार केदारनाथ या अमरनाथ गए। यहा बस मायने रखता है कितना तपोबल है। जैसे इलेक्शन मे मायने नहीं रखता किसने जनता की सेवा की है, मायने ये रखता है किसको वोट ज्यादा आए है। जिसका तपोबल ज्यादा वो जीतेगा ना की भक्ति मे दिनरात दिया जलाने वाला और तीर्थ यात्रा करने वाला।
मेरा तो युद्ध को पूर्ण समर्थन है, होना भी चाहिए तभी तो कचरा खतम हॉएगा और रंडी रोना करने वाले खतम होंगे। कुछ लोगोंके तो युद्ध शुरू हो गया ये खबर सुनके ही प्राण पखेरू उड़ जाएंगे। 2030 तक युद्ध हो चुका होगा, तबतक काली चलेगी, बगला चलेगी, भैरवी चलेगी, सारे रक्त पिपासु भैरव चलेंगे मसानी, डायने सब मृत देहों पर नाचेंगे, रक्त का पान होगा। अनेकों युगों की तृष्णा मिटेगी। उसके बाद एक सवेरा आएगा युद्ध समाप्त होगा सब मामला ठंडा हो चुका होगा। और तब शुरू होगा नैसर्गिक आपत्ति का दौर - भूकंप, बाढ़, अकाल, तसुनामी .. पृथ्वी लंबे अरसे के बाद करवट लेना शुरू करेगी, नैसर्गिक आपदाए शुरू हो जाएंगी। तब फ्यूचर नहीं ना कोई विकास ना कोई पार्टी! बस ये दिमाग मे रहेगा लोगों के की खुदकों जिंदा रखना है किसी भी हाल मे! परिवार नहीं, बीवी बच्चे नहीं, केवल खुद शाम तक जी गए बोहोत है। किसिको retirement की पड़ी नहीं होगी। न जायदाद की पड़ी होगी।
मानसिक और शारीरक रूप से कमजोर लोग युद्ध के बीच मे ही दम तोड़ देंगे। किसी भी हिंदू देवी देवताओं के हाथ मे शस्त्र सिर्फ pose देनेके लिए नहीं होते। सारे भगवान योद्धा ही है चाहे वो देव हो या देवी। अगर आप अध्यात्म मे रहके अहिंसा चाहते हो तो आपको मरना पड़ेगा। क्यों की आप वही deserve करते हो और वैसे भी भेड़ बकरिया बलि देनेके लिए ही होती है। अहिंसा के प्रवचन सुनने को युद्ध के काल मे किसिको टाइम नहीं होगा। पता चला कोई अहिंसा वादी अपना प्रवचन रखा है और दुश्मन देश का बॉम्ब आके हॉल ही उड़ा दिया सभी अहिंसावादी कीड़े एक साथ खतम! मैं तो बोलूँगा ऐसा ही होना चाहिए। रही बात ध्यान धारणा समाधि की तो वो भगवान लोग भी करते है पर युद्ध के टाइम ओन्ली युद्ध...नो बकचोदी प्लीज
युद्ध के काल मे न कोई नियम होगा ना कानून तो सब अपनी अपनी रक्षा का इंतजाम करके रखो। अभी भी एक दो साल का वक्त है राशन पानी से ज्यादा फिकर करो जिंदा रहने की आप राशन पानी जमा करोगे और आपको टपका कर कोई उसको ले जाएगा। जब आप खुदकी ही रक्षा नहीं कर सकते तो जमा किए हुए राशन की कैसे करोगे? इसलिए शस्त्र रखो और उसका प्रयोग भी सिख लो, प्रैक्टिस करो। खुद भी करो घर की बहु बेटियों की भी करने लगाओ। तब आपकी बहु बेटियांने कितने पढ़ाई मार्क्स है, कितने फॉलोवर्स है, कितना कमर मटका सकती है, या कोणसा मस्करा मेकअप मे लगाती है ये नहीं देखा जाएगा। दुश्मन (ये कोई भी हो सकता है मैं कोई विशेष समाज या किसीका विरोध नहीं करता, मैं सारे इंसानी कीड़ों का ही विरोधी हु फिर वो गटर का हो या गंगा का! bad bacteria हो या दही का good bacteria नियत सबकी खराब होगी क्यों की कलयुग मे किसी भी इंसान मे जमीर नाम की चीज नहीं है) आपके बहु बेटियों पे नजर रखे हुए है की कब युद्ध शुरू हो और मौके मिले। और आप लगे हो राशन जमा करने मे..अच्छा है करो राशन पानी जमा किसी के काम आएगा 😈
तब कोई ये नहीं देखेगा की ये मेरा पड़ोसी है मेरा दोस्त है या कोई रिश्तेदार है, रिश्तेदारी और नाते तबतक है जब तक समाज व्यवस्था है। युद्ध के समय समाजव्यवस्था सबसे पहले टूटती है। और किसिको ये नहीं पड़ी होती की कौन मेरे बारेमे क्या सोचेगा। तब सिर्फ भूक, और जिंदा रहने की तड़प मायने रखेगी। और तब जीने का हकदार वही है जो लड़ेगा।
मेरी बाते काल्पनिक लगेगी पर ये वास्तविकता मे बदलेगी और अवश्य बदलेगी, तब मेरी बात अवश्य मानोगे पर तब समय नहीं होगा और आपके नरक या स्वर्ग सिधारने का समय आ चुका होगा...!
मेरे तरफ से अड्वान्स मे ऐसे अहिंसावादीयो की आत्मा को शांति मिले ॐ शांति शांति शांति
I believe in War, Not in morality...!
हर हर महादेव शम्भो शंकरा!





